आज तक किसी भी विदेशी ताकत का गुलाम नहीं बना भूटान
थिम्फू । क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जो आज तक किसी भी विदेशी ताकत का गुलाम नहीं बना और माना जाता है कि भविष्य के बड़े युद्धों का असर भी उस पर बेहद सीमित रहेगा? यह देश है भूटान। हिमालय की गोद में बसा यह छोटा-सा राष्ट्र, जिसे “थंडर ड्रैगन का देश” कहा जाता है, इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आकार में छोटा होना कमजोरी नहीं होता। भूटान उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जिसे न तो ब्रिटिश साम्राज्य गुलाम बना सका, न मुगल और न ही कोई अन्य विदेशी शक्ति। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। चारों ओर ऊंचे-ऊंचे हिमालयी पर्वत, दुर्गम पहाड़ियां और घने जंगल इसे एक प्राकृतिक किले की तरह सुरक्षा प्रदान करते हैं। सदियों तक भूटान ने बाहरी दुनिया से दूरी बनाए रखी और इसी अलग-थलग नीति ने उसे बड़े युद्धों और आक्रमणों से दूर रखा। भूटान की ताकत सिर्फ उसकी भौगोलिक बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी राजनीतिक सोच भी उतनी ही अहम है। यह देश हमेशा से तटस्थता की नीति पर चलता आया है। वह किसी बड़े सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं है और न ही अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में दखल देता है। भारत और चीन जैसे दो बड़े देशों के बीच स्थित होने के बावजूद, भूटान ने दोनों के साथ संतुलित और शांतिपूर्ण रिश्ते बनाए रखे हैं। यही कारण है कि किसी भी वैश्विक युद्ध की स्थिति में भूटान एक कम आकर्षक और गैर-रणनीतिक लक्ष्य माना जाता है। भूटान की एक और अनोखी पहचान उसका विकास मॉडल है। यहां सकल घरेलू उत्पाद से ज्यादा महत्व सकल राष्ट्रीय खुशी, यानी ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस को दिया जाता है।
1970 के दशक में भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक ने यह विचार दिया कि किसी देश की प्रगति सिर्फ धन से नहीं, बल्कि लोगों की खुशी, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक शांति से मापी जानी चाहिए। इसी सोच का नतीजा है कि भूटान आज दुनिया का पहला कार्बन नेगेटिव देश है। यहां 70 प्रतिशत से अधिक भूमि जंगलों से ढकी है और संविधान में यह प्रावधान है कि कम से कम 60 प्रतिशत क्षेत्र हमेशा वन क्षेत्र ही रहेगा। यदि तीसरा विश्व युद्ध होता भी है, तो भूटान के अपेक्षाकृत सुरक्षित रहने की कई वजहें हैं। यहां न तो बड़े सैन्य अड्डे हैं, न तेल या गैस जैसे रणनीतिक संसाधन। देश काफी हद तक आत्मनिर्भर है—हाइड्रोपावर से ऊर्जा और जैविक खेती से भोजन की जरूरतें पूरी होती हैं। सबसे अहम बात यह है कि भूटान के पास लूटने या कब्जा करने लायक कुछ नहीं, सिवाय शांति, प्रकृति और खुशहाली के। यही कारण है कि युद्ध और हिंसा से भरी दुनिया में भूटान आज भी एक शांत, सुरक्षित और अनोखा उदाहरण बना हुआ है।
ज्ञात हो कि आज की दुनिया युद्ध, संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर मध्य-पूर्व और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों तक, वैश्विक तनाव लगातार बढ़ रहा है। इतिहास गवाह है कि अब तक दुनिया दो विश्व युद्ध देख चुकी है और मौजूदा हालात को देखकर तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं। बीते समय में शक्तिशाली देशों ने कमजोर राष्ट्रों पर कब्जा किया, उन्हें गुलाम बनाया और अपने साम्राज्य का विस्तार किया। भारत खुद सैकड़ों वर्षों तक ब्रिटिश गुलामी झेल चुका है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बेमेतरा जिले को दी 183 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितंबर तक सजेगा चक्रधर समारोह का भव्य मंच
कठिनाईयों और संघर्ष के बावजूद अपनी पहचान और गौरव को बनायें रखने वाले सिंधी समाज पर सभी को गर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज, देश-दुनिया के सामने खुली पर्यटन संभावनाओं की नई राह
सेवा संकल्प अभियान 2026: हुनर को मिल रही नई उड़ान’
पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं से कवर करें, शत-प्रतिशत टीकाकरण एवं गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन एवं एएनसी जांच सुनिश्चित हो: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
"हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
लगातार दो वर्ष देश में सर्वाधिक रिकवरी दर, यह किसानों की मेहनत का परिणाम है - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई को मिशन के रूप में लेकर कार्य करें-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
केन बेतवा लिंक परियोजना के क्रियान्वयन से बुंदेलखंड क्षेत्र में आयेगी खुशहाली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव