पाकिस्तान की निकलेगी दम, भारत तैयार कर रहा एक विशाल ‘ड्रोन फोर्स’
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पहली बार एक विशाल ‘ड्रोन फोर्स’ तैयार करने का फैसला कर लिया है। यह नई फोर्स भविष्य के किसी भी सैन्य हमले में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ यानी सबसे पहले जवाबी कार्रवाई करने वाली ताकत होगी। रक्षा प्रतिष्ठान के मुताबिक इस फोर्स को डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर सिस्टम का तकनीकी सहयोग मिलेगा, जिससे युद्ध के दौरान दुश्मन की गतिविधियों पर तेजी से नजर रखी जा सकेगी और सटीक हमले किए जा सके।
इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय के अनुसार फिलहाल करीब 50 हजार सैन्य कर्मियों को ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण मिल रहा है। अगले तीन वर्षों में 15 नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जाएंगे, जहां सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी के जरिए सैनिकों को रीयल-टाइम बैटल ट्रेनिंग दी जाएगी। भविष्य में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह फोर्स इंटेलिजेंस, सर्विलांस और प्रिसीजन स्ट्राइक यानी सटीक हमले की दोहरी भूमिका निभाएगी। इस वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और सेना के ‘आकाशतीर’ सिस्टम का सुरक्षा कवच मिलेगा।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा उत्पादन में भी तेजी से आत्मनिर्भरता हासिल की है। देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। तीनों सेनाओं के लिए थिएटर कमांड की तैयारी हो रही है। दुश्मन के सस्ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अब ‘सॉफ्ट किल’ तकनीक जैसे जैमिंग और स्पूफिंग के साथ ‘हार्ड किल’ तकनीक जैसे लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ड्रोन फोर्स की अवधारणा तब मजबूत हुई जब पाकिस्तान ने करीब 1,000 ड्रोन के जरिए भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरियों को परखने की कोशिश की। इसके बाद सेना ने तय किया कि भविष्य के युद्धों में हर सैनिक के पास अपना ड्रोन होना चाहिए। योजना के तहत सेना की प्रत्येक कोर में लगभग 8,000 ड्रोन शामिल किए जाएंगे, जिससे एक लाख ड्रोन की बड़ी ताकत तैयार होगी।
देश में रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और एमएसएमई की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। इस वर्ष 120 नए डिफेंस स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिनमें 20 कंपनियां ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों पर काम कर रही हैं। भारत अब मिसाइलों के अहम सेंसर और इंजन जैसे महत्वपूर्ण उपकरण भी खुद बना रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य के युद्ध ‘मल्टी-डोमेन’ होंगे, जहां अंतरिक्ष से समुद्र तक एक साथ लड़ाई लड़ी जाएगी। इसतरह से भारत अब इसतरह के ड्रोन विकसित कर रहा है जो बिना जीपीएस के भी काम कर सकें और जिन्हें जैम करना बेहद मुश्किल हो।

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