24 दिन के अनशन का असर, सोनम वांगचुक की सेहत पर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन उपवास मंगलवार को 24वें दिन में पहुंच गया है। अस्पताल में भर्ती वांगचुक की सेहत को लेकर जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक दल उनके स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है।
अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी और शारीरिक स्थिति
सोनम वांगचुक का उपचार वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी), सफदरजंग अस्पताल और एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम द्वारा किया जा रहा है। बुलेटिन के मुताबिक, उनके सभी प्रमुख शारीरिक मानक नियंत्रण में हैं, लेकिन उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी सामान्य सीमा से काफी नीचे बना हुआ है। इसके अलावा, जांच में उनका सीरम पोटैशियम स्तर 3.2 मिलीमोल प्रति लीटर पाया गया है, जो सामान्य मानक (3.5 से 5.0 मिलीमोल प्रति लीटर) से कम है।
गंभीर चिकित्सीय स्थितियां और रक्त संबंधी चुनौतियां
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वांगचुक पैनसाइटोपीनिया नामक समस्या से जूझ रहे हैं। इस चिकित्सीय स्थिति में मरीज को एनीमिया के साथ-साथ शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि इन सभी स्वास्थ्य संकेतकों और लैब रिपोर्टों की निरंतर और गहन जांच किया जाना बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों की सलाह और उपचार लेने से इनकार
अस्पताल प्रशासन उन्हें फिलहाल ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन और पोटैशियम सप्लीमेंट्स दे रहा है। हालांकि, चिकित्सा दल की बार-बार दी जा रही सलाह के बावजूद सोनम वांगचुक नसों के जरिए दिए जाने वाले आईवी (इंट्रावेनस) फ्लूइड और ग्लूकोज को लेने से मना कर रहे हैं।
डिहाइड्रेशन का खतरा और आगे की चिकित्सा रणनीति
लगातार जारी उपवास के कारण सोनम वांगचुक के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उन्हें हल्के से मध्यम स्तर का डिहाइड्रेशन हो गया है। डॉक्टरों का कहना है कि सामने आ रही शारीरिक असामान्यताओं को देखते हुए उन्हें सख्त निगरानी में रखना अनिवार्य है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को सभी आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं और आगे की रणनीति नई लैब रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

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