सरकार पांच सरकारी बिजली कंपनियों के आईपीओ लाएगी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पांच सरकारी बिजली बनाने वाली और ट्रांसमिशन कंपनियों की पहचान की है, जिन्हें स्टॉक मार्केट में लिस्टेड किया जाएगा ताकि वे अपनी क्षमता विस्तार कर सकें और उसे निवेश मिल सकें। एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकार ने बताया कि इन कंपनियों में आंध्र प्रदेश पावर जनरेशन कॉरपोरेशन और गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन इस समय मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा, सरकार राज्य सरकारों द्वारा संचालित बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की संभावना भी तलाश रही है। ये डिस्कॉम्स बिजली खरीद लागत में बढ़ोतरी, हाई ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नुकसान और उपभोक्ताओं से भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं। हाल ही में एक क्षेत्रीय बैठक में विभिन्न राज्यों ने बिजली वितरण सेवाओं की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से डिस्कॉम्स के निजीकरण में सहायता करने का अनुरोध किया था। डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने मंत्रियों का एक समूह गठित किया है, लेकिन पावर सचिव ने वित्तीय राहत पैकेज की संभावना से इनकार किया है। सरकार कुछ डिस्कॉम्स को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड करने पर भी विचार कर रही है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने संचयी घाटे को कम करना होगा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 तक, देशभर के डिस्कॉम्स का कुल घाटा 6.92 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक उनका कुल बकाया कर्ज 7.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, राज्यों ने डिस्कॉम्स को सब्सिडी भुगतान में सुधार किया है और औसत आपूर्ति लागतऔर औसत राजस्व प्राप्ति के बीच का अंतर 2022-23 में 45 पैसे प्रति किलोवाट-घंटा से घटकर 2023-24 में 19 पैसे रह गया है। जनवरी 2025 तक, यह अंतर और कम होकर 0.10 पैसे प्रति किलोवाट-घंटा हो गया।

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