दिल्ली सरकार का मेगा प्रोजेक्ट: ट्विन टावर सचिवालय की नींव रखी गई
नई दिल्ली: आईटीओ पर दिल्ली सरकार का नया सचिवालय बनाने के लिए काम शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए एक कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करके योजना को आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मांगी है। नए सचिवालय के निर्माण की प्रस्तावित लागत 2042 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके लिए आईटीओ पर ही नए ट्विन टावर का निर्माण किया जाएगा।
दिल्ली सरकार के सभी विभागों को उनमें शिफ्ट किया जाएगा। अगर समय पर सारी जरूरी मंजूरियां मिल गई, तो 8 से 10 साल के अंदर दो चरणों में इसका निर्माण होगा। प्रत्येक चरण को पूरा करने में लगभग 48 महीने का समय लगेगा। नए सचिवालय की इमारत कितनी ऊंची होगी, उसकी डिजाइन कैसी होगी, उसमें क्या-क्या सुविधाएं होंगी, यह कंसल्टेंट एजेंसी तय करेगी। फिलहाल पीडब्ल्यूडी ने कंसल्टेंट हायर करने के लिए कैबिनेट से 52 करोड़ रुपये की मंजूरी मांगी है।
इंटरकनेक्टेड होंगे टावर
दस्तावेजों के अनुसार आईटीओ पर स्थित विकास भवन और डुसिब (दिल्ली इमारतों और दूसरी तरफ स्थित MSO शहरी आश्रय सुधार बोर्ड) मुख्यालय की पुरानी बिल्डिंग और जीएसटी भवन परिसर को तोड़कर ट्विन टावर बनाया जाएगा। दोनों टावरों को इंटरकनेक्ट करने के लिए एक अंडरपास भी बनाया जाएगा। नए सचिवालय में सीएम, मंत्री, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, विभागों के प्रधान सचिवों और सचिवों के कार्यालयों के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के ऑफिस होंगे। सरकार का मानना है कि इससे सरकार के कामकाज में तेजी आएगी। अधिकारियों को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाकर काम करने में लगने वाले समय की बचत होगी।
ITO पर ही ट्विन टावर बनाने का फैसला
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले महीने सरकारी कार्यालयों में सफाई अभियान की शुरुआत करते समय एक इंटिग्रेटेड सचिवालय बनाने की घोषणा की थी। उसके बाद से ही सरकार नया सचिवालय बनाने के लिए जगह की तलाश में जुट गई थी। इसके लिए आईटीओ के अलावा राजघाट पावर प्लांट वाली जगह को लेकर भी एक बैठक में चर्चा की गई थी। मगर अब सरकार ने आईटीओ पर ही ट्विन टावर में सचिवालय बनाने की योजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
1982 में बनी थी सचिवालय बिल्डिंग
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सिविल लाइंस स्थित पुराना सचिवालय 1912 में बना था। उसे अंग्रेजों ने बनाया था। मगर अभी आईपी एस्टेट के पास जिस इमारत में दिल्ली सचिवालय मौजूद है, उसे 1982 में एशियाई खेलों के दौरान होटल के तौर पर बनाया गया था। इसका नाम प्लेयर्स बिल्डिंग रखा गया था। बाद में इसे दिल्ली का नया सचिवालय बनाया गया। यह बिल्डिंग 40,970 वर्ग मीटर में बनी हुई है।

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