केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के परिवार की विदेशी संपत्ति पर फिर छिड़ी बहस
नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार की स्विट्ज़रलैंड में स्थित आवासीय संपत्ति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। यह संपत्ति उनकी पत्नी और पूर्व राजनयिक लक्ष्मी एम. पुरी के नाम पर दर्ज है, जिसे वर्ष 2006 में खरीदा गया था। यह जानकारी न केवल सार्वजनिक दस्तावेजों में उपलब्ध है, बल्कि राज्यसभा नामांकन के दौरान दाखिल किए गए उनके शपथपत्र में भी दर्ज की गई है। शपथपत्र में इस फ्लैट को परिवार की संपत्ति बताते हुए खरीद वर्ष 2006 स्पष्ट उल्लेखित है, जिससे यह साफ होता है कि इसकी जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद रही है।
इस संपत्ति को लेकर समय-समय पर राजनीतिक आरोप सामने आते रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए कि क्या यह खरीद आय के अनुरूप थी और इसके लिए धन का स्रोत क्या था। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मी पुरी और उनकी कानूनी टीम ने स्पष्ट किया कि संपत्ति संयुक्त राष्ट्र में उनके कार्यकाल के दौरान प्राप्त कर-मुक्त वेतन, बैंक ऋण और पारिवारिक संसाधनों से खरीदी गई थी।
ताजा विवाद तब उभरा जब कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह संपत्ति कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफ़्री एपस्टीन के बंगले से लगभग दस मिनट की दूरी पर स्थित है। हालांकि इसका कोई प्रत्यक्ष संबंध संपत्ति खरीद से नहीं है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी में इस दूरी को लेकर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है, पुरी परिवार एपस्टीन के संपर्क लंबे समय से है। उन्होंने कुछ मुलाकातों का उल्लेख किया है। अब आरोप-प्रत्यारोपों के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, जहां पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन की नैतिकता और विदेशी संपत्तियों के खुलासे जैसे प्रश्न केंद्र में हैं।
एपस्टीन फाइल का मामला अब विश्वव्यापी हो गया है। कई देशों के 2 दर्जन से अधिक नेताओं और अधिकारियों को अपना पद छोड़ना पड़ा है। हरदीप पुरी के पास लंबे समय से पेट्रोलियम मंत्रालय है। भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। जिसके कारण पुरी की विदेश में सम्पत्ति और कालेधन को लेकर विपक्ष के निशाने पर हरदीप पुरी का परिवार है। आने वाले दिनों में पुरी के लिये कठनाईयां बढ़ सकती है।

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