Balrampur Chini और अन्य शुगर शेयरों में 4% की कमजोरी
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा घरेलू बाजार में मिठास बनाए रखने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लागू कर दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी कर चीनी की निर्यात नीति को 'प्रतिबंधित' श्रेणी से हटाकर पूरी तरह से 'निषिद्ध' श्रेणी में डाल दिया है, जो आगामी 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार के इस कड़े कदम का सीधा असर शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहाँ खबर सार्वजनिक होते ही चीनी उत्पादक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
चीनी कंपनियों के शेयरों में मची खलबली
सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों के निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसके कारण प्रमुख चीनी स्टॉक्स औंधे मुंह गिर पड़े। बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि धामपुर शुगर मिल्स के शेयर सबसे अधिक चार प्रतिशत से ज्यादा टूटकर निचले स्तर पर आ गए। इसी प्रकार त्रिवेणी इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर्स, डालमिया भारत शुगर और ईआईडी पैरी जैसी स्थापित कंपनियों के शेयर भी बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे और लाल निशान पर कारोबार करते देखे गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात बंद होने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
निर्यात पाबंदी के दायरे और विशेष छूट की स्थिति
सरकार ने हालांकि इस प्रतिबंध में कुछ विशेष परिस्थितियों और देशों को रियायत प्रदान की है, जिसके तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा योजना के अंतर्गत होने वाला चीनी का निर्यात निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इसके साथ ही उन खेपों को भी राहत दी गई है जिनकी लोडिंग प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रारंभ हो चुकी थी या जिनके शिपिंग बिल पहले ही दाखिल किए जा चुके थे। जिन जहाजों ने भारतीय बंदरगाहों पर एंकर कर लिया था या जो खेप सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंपी जा चुकी थीं, उन्हें तकनीकी जांच के उपरांत गंतव्य तक जाने की अनुमति दी जाएगी।
खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अनुरोध पर लचीला रुख
निर्यात पर लंबी अवधि की इस रोक के बावजूद सरकार ने अन्य देशों के प्रति मानवीय और कूटनीतिक दृष्टिकोण खुला रखा है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई देश अपनी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों के आधार पर औपचारिक रूप से भारत सरकार से अनुरोध करता है, तो विशेष अनुमति के तहत चीनी निर्यात पर विचार किया जा सकता है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखना है, ताकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं का प्रभाव घरेलू अर्थव्यवस्था पर न पड़े।

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