आईपीएस प्रतिनियुक्ति में बड़ा बदलाव, पहली बार एडीजी के 33 पद मंजूर
दिल्ली। कैबिनेट द्वारा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी गई है। अब बिल को संसद के चालू सत्र में पेश किया जाएगा। इससे पहले ही सरकार ने केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के लिए स्वीकृत शीर्ष रैंक में बदलाव कर दिया है। केंद्र में पहली बार एडीजी के 33 पद मंजूर किए गए हैं। एसडीजी और आईजी के पदों में कटौती की गई है।
हालांकि एसपी के पद बढ़ा दिए गए हैं।
आईपीएस प्रतिनियुक्ति वाले पदों की संख्या बदली ...
एक मार्च 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के तहत डीजी के स्वीकृत पदों की संख्या 15 थी। स्पेशल डीजी 'एसडीजी' के पद 12, एडीजी के 25, आईजी के 149, डीआईजी के 256 और एसपी के 228 पद स्वीकृत किए गए थे। जून 2025 में डीजी के 15, एसडीजी के 12, एडीजी के 26, आईजी के 150, डीआईजी के 254 और एसपी के 221 पद मंजूर किए गए। इसके बाद दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में डीजी के 15, एसडीजी के 17, एडीजी के 30, आईजी के 158, डीआईजी के 256 और एसपी के 225 पद स्वीकृत किए गए थे।
9 मार्च 2026 की रिपोर्ट में हुआ ये बदलाव ...
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के पदों में बदलाव किया गया है। इस बार डीजी के 15 पद ही रखे गए हैं, जबकि एसडीजी के पदों में कटौती कर दी गई है। अब इन पदों की संख्या 14 रहेगी। एडीजी के पदों को बढ़ाकर 33 कर दिया गया है। आईजी के पद भी कम होकर 150 रह गए हैं। डीआईजी के पदों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एसपी के पद 225 से बढ़ाकर 229 किए गए हैं।
क्यों लाया जा रहा है बिल ...
पिछले साल 23 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सीएपीएफ कैडर अफसरों के करियर प्रोग्रेशन के संबंधित एक महत्वपूर्ण केस में फैसला दिया था। उसमें कहा गया कि सरकार, सीएपीएफ में 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को दो साल में धीरे-धीरे कम करे। इन बलों में एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए ही नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'संगठित समूह ए सेवा' (ओजीएएस) पैटर्न' लागू किया जाए। सीएपीएफ में छह माह के भीतर 'कैडर रिव्यू' हो। केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' दायर की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। बाद में अवमानना केस में सरकार को नोटिस जारी हुआ। इसके बाद सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए प्रस्तावित विधेयक लाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था।
पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ते चले गए कैडर अफसर ...
कैडर अधिकारी, पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ते जा रहे हैं। उन्हें मजबूरन कोर्ट में जाना पड़ा। 2015 में वे हाईकोर्ट से जीते और 2019 में सुप्रीम कोर्ट से जीत गए, लेकिन फिर भी नए सर्विस रूल नहीं बन सके। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार टालमटोल की नीति पर चलती रही। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के हजारों अफसर प्रमोशन एवं वित्तीय फायदों में हुए भेदभाव को लेकर परेशान हैं। जूनियर अफसरों को तो 15 वर्ष में पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही। जिस तरह से केंद्र सरकार की दूसरी संगठित सेवाओं में एक तय समय के बाद रैंक या फिर उसके समकक्ष वेतन मिलता है, वैसा सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है। करीब बीस साल की सेवा के बाद आईपीएस अधिकारी आईजी बन जाता है, लेकिन कैडर अफसर उस वक्त कमांडेंट के पद तक पहुंच पाता है। मौजूदा दौर में तो वह भी संभव नहीं है। वजह, सीआरपीएफ और बीएसएफ में तो डेढ़ दशक में पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही।
अभी तक नहीं बन पाए सर्विस रूल ...
कैडर अफसर 35 साल की नौकरी के बाद बड़ी मुश्किल से डीआईजी या आईजी बनता है। मौजूदा समय में तो यह भी संभव नहीं दिख रहा। डीओपीटी ने 2008-09 के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों में ओजीएएस यानी 'आर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' के तहत सेवा नियम बनाने के आदेश जारी किए थे। अभी तक सर्विस रूल नहीं बनाए गए हैं। बल के कैडर अधिकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बावजूद कोई राहत नहीं दी। मई में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सीएपीएफ के कैडर अफसरों को यह उम्मीद बंधी थी कि अब उनके साथ न्याय होगा, लेकिन अब एक बार फिर से वह उम्मीद धूमिल हो गई है।

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