नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की ऊंची गगनचुंबी इमारतें दूर से जितनी शानदार दिखती हैं, उनके भीतर उतना ही बड़ा जोखिम भी छिपा है। कंक्रीट के इन ऊंचे जंगलों में आग लगने की स्थिति में केवल सामान का नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरी इमारत के जमींदोज होने का खतरा रहता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश फ्लैट मालिक केवल अपने घर के सामान का बीमा कराते हैं, जबकि पूरी बिल्डिंग के ढांचे (स्ट्रक्चर) का बीमा अब भी एक अनसुना विषय है।


हाईराइज सोसायटियों में आग का खतरा: सिर्फ घर नहीं, पूरी संपत्ति हो सकती है खाक

दिल्ली-एनसीआर में 25 से 40 मंजिला इमारतों का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आग लगने की स्थिति में आपकी करोड़ों की संपत्ति मलबे में तब्दील हो सकती है? विशेषज्ञों के अनुसार, आग लगने पर जब तापमान 600 से 800 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचता है, तो कंक्रीट के भीतर लगा सरिया अपनी मजबूती खो देता है। यदि आग नींव तक पहुँच जाए, तो पूरी इमारत को असुरक्षित घोषित कर गिराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

बीमा का भ्रम: क्या आप सुरक्षित हैं?

ज्यादातर फ्लैट मालिक 'कंटेंट इंश्योरेंस' (सामान का बीमा) कराते हैं, जो केवल फर्नीचर और गैजेट्स तक सीमित होता है। यदि पूरी इमारत ढह जाती है, तो नुकसान का बोझ सीधे फ्लैट मालिक पर आता है।

  • बड़ा झटका: यदि फ्लैट पर लोन चल रहा है, तो इमारत खत्म होने के बाद भी बैंक की ईएमआई (EMI) जारी रहती है।


संकट की स्थिति में आपके पास मौजूद तीन कठिन रास्ते

विकल्प स्थिति हकीकत
मास्टर इंश्योरेंस यदि पूरी बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल बीमा है। यह सबसे सुरक्षित है, बीमा कंपनी दोबारा निर्माण का खर्च उठाती है।
कानूनी लड़ाई बिल्डर या फायर सिस्टम की विफलता पर केस। यह प्रक्रिया बहुत लंबी और थकाऊ है, जिसमें दशकों लग सकते हैं।
जमीन का मालिकाना हक (UDS) जमीन बेचकर या नए बिल्डर से समझौता कर। सभी फ्लैट मालिकों की एकमत सहमति लेना लगभग असंभव होता है।

लापरवाही की जमीनी हकीकत

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की कई सोसायटियों में फायर एनओसी (NOC) तो कागजों पर मौजूद है, लेकिन हकीकत में फायर सिस्टम अक्सर खराब या बंद मिलते हैं। एक फ्लैट की छोटी सी चिंगारी पूरी इमारत के लिए 'चेन रिएक्शन' बन सकती है।


फ्लैट खरीदारों और निवासियों के लिए जरूरी 'चेकलिस्ट'

घर खरीदने से पहले या आरडब्ल्यूए (RWA) की मीटिंग में इन बिंदुओं पर जरूर ध्यान दें:

  1. स्ट्रक्चरल बीमा: जांचें कि क्या पूरी बिल्डिंग का बीमा है या केवल व्यक्तिगत फ्लैटों का।

  2. फायर सिस्टम की कार्यक्षमता: क्या स्प्रिंकलर, फायर अलार्म और हाइड्रेंट वास्तव में चालू स्थिति में हैं?

  3. ऑडिट रिपोर्ट: 5 से 10 साल पुरानी इमारतों का नियमित 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' कब हुआ था?

  4. आरडब्ल्यूए का फंड: मेंटेनेंस और रिजर्व फंड की पारदर्शिता और वित्तीय स्थिति क्या है?

  5. निर्माण की गुणवत्ता: बिल्डर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड और निर्माण सामग्री की साख कैसी है?