सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हौज खास डियर पार्क में अब रहेंगे सिर्फ 38 हिरण, बाकी को मिलेगा प्राकृतिक आवास

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रसिद्ध ए.एन. झा डियर पार्क में हिरणों की अनियंत्रित संख्या और संसाधनों की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि इस पार्क में अब अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकेंगे। शेष हिरणों को वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए देश के विभिन्न वन्यजीव अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाएगा।

"पिंजरों में वन्यजीवों को रखना अनुचित"

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वन्यजीव संरक्षण के सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि जानवरों को सीमित बाड़ों या पिंजरों में रखना पारिस्थितिक और कानूनी, दोनों ही दृष्टियों से गलत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों का वास्तविक संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में ही संभव है। केवल असाधारण स्थितियों में ही उन्हें बाड़ों में रखने की अनुमति दी जा सकती है।

स्थानांतरण के लिए सख्त दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को निर्देश दिए हैं कि:

  • पार्क में शेष बचे हिरणों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा, प्रशिक्षित स्टाफ और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए।

  • डियर पार्क का 'संरक्षित वन' का दर्जा हर हाल में बरकरार रहे।

  • पर्यावरण मंत्रालय छह महीने के भीतर वन्यजीवों के सुरक्षित परिवहन, टैगिंग और पुनर्वास के लिए वैज्ञानिक मानक लागू करे।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

  1. बढ़ती आबादी: केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट के अनुसार, जन्म नियंत्रण और नसबंदी के उपाय प्रभावी न होने के कारण हिरणों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई थी।

  2. कानूनी अड़चन: डियर पार्क का 'मिनी जू' का दर्जा और लाइसेंस साल 2021 में ही समाप्त हो चुका था। बिना वैध मान्यता के इतनी बड़ी संख्या में हिरणों को रखना गैर-कानूनी पाया गया।

  3. संसाधनों का अभाव: रिपोर्ट में चारे की कमी और पशु चिकित्सा सुविधाओं की बदहाली का भी जिक्र किया गया है।

राजस्थान के रिजर्व में मिल सकता है नया घर

सीईसी ने स्थानांतरण के लिए राजस्थान के रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का निरीक्षण किया है। इन हिरणों को इन्हीं सुरक्षित और प्राकृतिक स्थलों पर छोड़ने की योजना है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीईसी करेगी ताकि जानवरों को कोई शारीरिक कष्ट न हो।