छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 को चुनौती; ईसाई समुदाय पहुंचा हाई कोर्ट
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026’ के खिलाफ ईसाई समुदाय ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। समुदाय की ओर से क्रिस्टोफर पाल ने इस कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताया है। याचिका में मुख्य रूप से अवैध धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास जैसे कठोर दंड और भारी जुर्माने के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
नए कानून के तहत जबरन या लालच से धर्मांतरण कराने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और सामूहिक धर्मांतरण में 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य किया गया है और इन अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल धोखाधड़ी और दबाव से होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए है।

छावनी क्षेत्र में जमीन विवाद, 29 बंगलों पर सर्वे ने बढ़ाई हलचल
इस माह भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन, बढ़ेंगी व्यापारिक संभावनाएं
क्रूज हादसे के बाद विवाद, पायलट ने शव ले जाने से किया मना
बस और ट्रक की जोरदार टक्कर, मौके पर मचा हड़कंप
पलक्कड़ में कांग्रेस की जीत, पिशारोडी के सिर सजा जीत का ताज
बड़वानी में बस में अचानक आग, यात्रियों में मची चीख-पुकार
भोपाल में किसानों का SDM ऑफिस के बाहर धरना, गेहूं स्लॉट बुकिंग पर आक्रोश
सुनेत्रा पवार की ऐतिहासिक जीत, 2.18 लाख वोटों से रचा रिकॉर्ड
अब पाकिस्तान से निवेश पर सख्ती, सीधे निवेश नहीं—सरकार की मंजूरी जरूरी
बंगाल-असम में BJP की जीत पर CM डॉ. मोहन यादव का बड़ा बयान, कहा- हर तरफ लहराया भगवा