निवेशकों को राहत: युद्ध की छाया में भी अमेरिकी शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, इतने फीसदी मजबूत हुआ एसएंडपी 500
दुनियाभर की अर्थव्यवस्था युद्ध की छाया में थम सी गई थी, लेकिन अमेरिकी शेयर बाजार ने बुधवार को एक मजबूत वापसी दिखाकर निवेशकों को राहत दी। दो दिन की हड़कंप जैसी गिरावट के बाद एसएंडपी 500 इंडेक्स 1% बढ़ा और युद्ध के बाद हुए नुकसान को लगभग खत्म कर दिया। वहीं डॉव जोन्स औसत 319 अंक ऊपर गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 1.5% मजबूत हुआ। शुरुआत में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 12.1% गिर गया, जो उसकी इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट थी।बता दें कि बाजार में अनिश्चितता का मुख्य कारण ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल का जारी युद्ध और फिर तेल की बढ़ती कीमतें रही। हालांकि बुधवाह को तेल की कीमतें भी स्थिर हुईं। ब्रेंट क्रूड का भाव 84 डॉलर से घटकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल हो गया और अमेरिकी क्रूड का भाव 74.66 डॉलर पर रहा।
बाजार को मिला अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए अच्छे संकेत का साथ
देखा जाए तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए अच्छे संकेतों ने भी बाजार को सहारा दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि रियल एस्टेट, वित्त और अन्य सेवाओं में व्यापार की वृद्धि पिछले साल की तुलना में सबसे तेज गति से हुई। साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी भी धीरे-धीरे हो रही थी, जो महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है।इतना ही नहीं नौकरी के क्षेत्र में भी सुधार दिखा। गैर-सरकारी रोजगार में तेजी आई, जो शुक्रवार को आने वाली व्यापक रोजगार रिपोर्ट के लिए अच्छे संकेत हैं। हालांकि कुछ निवेशक इस बीच सतर्क हैं। वेंचरस्मार्ट एशिया के सीईओ फ्रांसिस लुन ने कहा कि ईरान का मामला नियंत्रण से बाहर हो रहा है और ट्रंप ने गलत अनुमान लगाया।
ये कंपनियां रही बढ़ोतरी में प्रमुख
गौरतलब है कि बाजार में बढ़ोतरी में क्रिप्टो कंपनियां, रिटेल और ट्रैवल कंपनियां, और बड़ी टेक कंपनियां प्रमुख रही। कॉइनबेस 15.3% और रोबिनहुड 8.3% बढ़ा। रॉस स्टोर्स 7% और एक्सपीडिया 3.1% मजबूत हुई। एनवीडिया 2% और अमेजन 4% ऊपर गया। दूसरी ओर एशिया में हांगकांग और जापान के शेयर गिरावट में थे, जबकि यूरोप में फ्रांस का CAC 40 0.8% और जर्मनी का DAX 1.7% ऊपर गया।इसके साथ ही बॉन्ड मार्केट में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.08% हो गया। ऐसे में फेडरल रिजर्व के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि उसका काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत रखना और महंगाई को नियंत्रित करना है। युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें फेड के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

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