बांग्लादेश: उस्मान हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी के अंदरूनी सत्ता संघर्ष का खुलासा
ढाका । बांग्लादेश की राजनीति को झकझोर देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा राजनीतिक खुलासा सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्या किसी बाहरी साजिश का नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का नतीजा हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि हादी की बढ़ती लोकप्रियता से संगठन के कट्टरपंथी नेतृत्व में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी खासकर युवाओं और छात्र वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले वे एक मजबूत राजनीतिक फैक्टर बन चुके थे। उनका उभरता प्रभाव जमात की पारंपरिक राजनीति और पुराने नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा था। इसी वजह से संगठन के भीतर एक गुट उन्हें “रास्ते से हटाने” के पक्ष में आ गया। बताया जा रहा है कि हादी की हत्या की साजिश ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के कार्यालय में रची गई। सूत्रों का दावा है कि शुरुआत में हत्या की सुपारी एक करोड़ टका में तय करने की बात हुई थी, लेकिन रकम को लेकर संगठन के भीतर ही मतभेद उभर आए। एक धड़ा इसे बड़ी राजनीतिक बाधा बताते हुए ज्यादा रकम देने के पक्ष में था, जबकि दूसरा गुट खर्च कम रखने पर अड़ा रहा। इसी खींचतान के दौरान मामला अंदरूनी तौर पर लीक होने की बात कही जा रही है। शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनने का भी दावा है।
इस बीच, हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिशें भी की गईं। आरोप लगाया गया कि आरोपी भारत भागकर मेघालय में छिपे हैं, लेकिन इस थ्योरी के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। दुबई भागने की कहानी भी गढ़ी गई, पर वहां भी प्रमाणों का अभाव रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, कट्टरपंथी संगठनों के भीतर की दरार और सत्ता संघर्ष की तस्वीर पेश करता है।

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