निगम-मंडलों में खींचातानी: सत्ता बनाम संगठन की जंग तेज
नई दिल्ली। मप्र सरकार और संगठन की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरअसल प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करने के तुरंत बाद राज्य सरकार निगम-मंडलों की सूची जारी करने की रणनीति बना रही थी। दिल्ली से आए बीएल संतोष ने लिस्ट पर अपनी सहमति भी दे दी। लेकिन अब पता चल रहा है कि लिस्ट को लेकर पार्टी में विवाद खड़े हो गए हैं। क्योंकि अभी तक सरकार और संगठन ने अपने हिसाब से लिस्ट तैयार की थी। लेकिन संघ ने बीच में हस्तक्षेप कर सरकार और संगठन के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार संघ ने हर संभाग से एक नेता को निगम-मंडल में शामिल करने का निर्देश दिया है। संघ के हस्तक्षेप के बाद सूची को दोबारा तैयार किया जा रहा है। ऊपर से पूर्व सीएम उमा भारती का प्रदेश कार्यालय पहुंचना और अपने पसंदीदा समर्थकों को निगम-मंडल में शामिल करने के लिए कहना पार्टी के लिए समस्या का सबब बनता जा रहा है। गौरतलब है कि मंगलवार को उमा भारती भाजपा के प्रदेश कार्यालय पहुंची थी जहां उन्होंने करीब आधे घंटे तक प्रदेश अध्यक्ष से गुप्त वार्ता की थी। जब वो बाहर आई तो मुस्कुरा रहीं थीं और प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल टेंशन में लग रहे थे। मतलब साफ है कि निगम-मंडल की नियुक्ति सरकार और संगठन के लिए टेढी खीर बनता जा रहा है। वहीं निगम-मंडलों की सूची में जितनी देरी होती जा रही है उतना ही संगठन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भोपाल में डेरा जमा कर बैठ गए हैं। इस बीच जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव लगातार दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं उससे सरकार की बेचैनी का आलम भी समझा जा सकता है। मंगलवार को भी सीएम यादव दिल्ली दौरे पर थे जहां उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना यही जा रहा है कि निगम-मंडल पर सहमति बनाने और सूची को अंतिम टच देने के लिए सीएम दिल्ली गए थे। उम्मीद है सरकार और संगठन मिल कर हफ्ते भर के अंदर निगम-मंडलों की सूची को जारी कर देंगे।

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