चुनावी मंच पर गूंजा मैथिली ठाकुर का सुर, कैसे बनी लोक गायिका से लोकप्रिय चेहरा
मुंबई: प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका मैथिली ठाकुर, जिनकी आवाज में एक अलग ही जादू है। अब वह राजनीति की दुनिया में कदम रख चुकी हैं। बिहार चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुईं। अलीनगर सीट से चुनाव लड़ा। आज चुनाव परिणाम आने पर उनके राजनीति सफर का भाग्य तय होगा। इससे पहले जानिए, मैथिली ठाकुर के जीवन और संगीत के सफर के बारे में।
कौन हैं मैथिली ठाकुर?
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था। उनके पिता रमेश ठाकुर और माता भारती ठाकुर दिल्ली में रहते हैं, जो शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। गायिक का बचपन से ही संगीत के प्रति रुझान था, उन्होंने चार साल की उम्र से ही अपने दादा से संगीत सीखना शुरू किया और दस साल की उम्र तक जागरणों और स्थानीय संगीत समारोहों में कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने लगीं।
साल 2011 में हुआ संगीत का सफर
मैथिली की संगीत यात्रा 2011 में शुरू हुई, जब वह जी टीवी में प्रसारित होने वाले लिटिल चैंप्स नामक एक रियलिटी शो में दिखाई दी थीं। इसके बाद साल 2017 में गायिका ने 'राइजिंग स्टार' के सीजन 1 में 'ओम नम: शिवाय' गाया, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 'होली रे रसिया', 'हरि नाम नहीं तो जीना क्या', 'महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम' से लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गईं। आज गायिका अपने छोटे भाइयों ऋषभ और अयाची के साथ मिलकर भक्ति गानों के साथ बिहार की लोक संस्कृति को भी गानों के जरिए बयां करती हैं।
कब से उठी राजनीति में शामिल होने की चर्चा?
संगीत जगत में नाम कमाने के बाद मैथिली ठाकुर ने राजनीति में आने का सोचा। बिहार चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी। कुछ वक्त बाद वह बिहार चुनाव में खड़ी हो गईं। इस वक्त भी जब वोटों की गिनती चल रही है तो वह अपनी सीट से आगे चल रही हैं।

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