कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है: जयराम
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जीएसटी 2.0 को लेकर केंद्र सरकार की हालिया घोषणाओं पर कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है।
उन्होंने एक्स पर लिखा- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है, जो दरों की संख्या घटाए, बड़े पैमाने पर उपभोग होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दरें कम करे, टैक्स चोरी, गलत वर्गीकरण और विवादों को न्यूनतम करे, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर समाप्त करे, एमएसएमई पर प्रक्रियागत नियमों का बोझ कम करे और जीएसटी के दायरे का विस्तार करे। क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
बता दें केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने बुधवार शाम संवैधानिक निकाय जीएसटी परिषद की बैठक के बाद बड़े ऐलान किए थे। जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से भाषण में इसके निर्णयों की सारगर्भित घोषणा की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रमेश ने जीएसटी 1.0 पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजी खपत में कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें और अंतहीन वर्गीकरण विवादों के बीच केंद्र सरकार को अब मानना पड़ा है कि जीएसटी 1.0 अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुका है। जीएसटी 1.0 की डिजाइन ही त्रुटिपूर्ण थी और कांग्रेस ने जुलाई 2017 में ही इस पर ध्यान दिला दिया था, जब पीएम मोदी ने अपना यू-टर्न लेकर इसे लागू करने का फैसला लिया था। इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि बुधवार को की गई घोषणाओं ने सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि पीएम मोदी पहले ही प्री-दीवाली डेडलाइन तय कर चुके थे। माना जा रहा है कि दर कटौती के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे। हालांकि असली जीएसटी 2.0 का इंतजार अभी भी जारी है। क्या यह नया जीएसटी 1.5 निजी निवेश, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा, यह देखना बाकी है। क्या इससे एमएसएमई पर बोझ कम होगा, यह तो समय ही बताएगा।
रमेश ने राज्यों की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि इस बीच राज्यों की एक अहम मांग, जो कि सहकारी संघवाद की सच्ची भावना से की गई थी, यानी राजस्व की पूर्ण सुरक्षा के लिए पांच और सालों तक मुआवजा अवधि का विस्तार, अभी भी अनसुलझी है। वास्तव में दर कटौती के बाद इस मांग का महत्व और भी बढ़ गया है।

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