यमुना प्रदूषण पर सरकार का कड़ा रुख, बिना ट्रीटमेंट वेस्ट डालने वालों पर होगी कार्रवाई
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने राजधानी में बिना ट्रीटमेंट के सेप्टेज (सीवेज अपशिष्ट) को नालों व यमुना नदी में डाले जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए तुरंत कदम उठाने के आदेश दिए हैं.
मंत्री सिरसा ने कहा कि यह समस्या वर्षों की सरकारी लापरवाही व पहले की सरकारों की निष्क्रियता का परिणाम है. पिछली सरकारों की घोर लापरवाही के कारण यमुना की सफाई उपेक्षित रही. तत्कालीन मुख्यमंत्री दिल्ली जल बोर्ड के प्रमुख थे. उन्होंने न तो समय पर कार्रवाई की और न ही एनजीटी की चेतावनियों को गंभीरता से लिया.
पर्यावरण मंत्री ने यह भी बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की बार-बार की चेतावनियों व 18 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय जुर्माने के बावजूद यमुना में बिना ट्रीटमेंट सेप्टेज का बहाव जारी रहा. उन्होंने इस स्थिति को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को 7 दिन में जांच रिपोर्ट व 10 दिन में विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है.
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि अप्रैल 2025 में 2.42 करोड़ लीटर सेप्टेज को ट्रीट किया गया है. साथ ही दिल्ली सरकार द्वारा सेप्टेज प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2024 लागू किए गए हैं, जिससे दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई विभाग, नगर निगम व दिल्ली पुलिस को उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई का अधिकार दिया गया है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में ‘मिशन यमुना क्लीनअप’ को नई गति मिली है. अब हम बीते समय की गलतियों को सुधारकर स्वच्छ व निर्मल यमुना की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिल्ली सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता व गंभीरता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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